उच्चाटन , विद्वेषण एवं मारण /



 उच्चाटन ' का अर्थ है - 

किसी व्यक्ति को अपने स्थान से हटने के लिए उसके मन को उच्चाटित कर देना । अर्थात् उच्चाटन मन्त्र का प्रयोग करने पर वह व्यक्ति अपने निवासस्थान से स्वयं ही हट फर कहीं अन्यत्र चला जाता है । ऐसे प्रयोग प्रायः अपने किसी शत्रु को उसके मानास - स्थान से हटा देने के लिए किये जाते हैं और आवश्यक होने पर इनका प्रयोग अनुचित भी नहीं माना जाता क़्योकि इन प्रयोगों में अथवा विरोधी केवल अपना स्थान ही छोड़ता है उसे अन्य कोई कष्ट नहीं होता ।


विद्वेषण ' का अर्थ है - 

किन्हीं दो मित्रों अधना प्रेमियों में परस्पर विरोध उत्पन्न करा देना । जब कभी यह अनुभव हो कि कोई दो व्यक्ति संयुक्त रूप से हानि पहुँचाने के इच्छुक हैं , उस समय उन दोनों में परस्पर विरोध करा देने से प्रयोगकर्ता का हित - साधन होता है । अतः आवश्यकता के समय ' विदूषण ' का प्रयोग भी अनुचित नहीं माना जाता


मारण का अर्थ है - 

किसी व्यक्ति की मृत्यु के लिए मन्त्र - प्रयोग करना । यह प्रयोग अत्यन्त अनुचित माना गया है , क्योंकि इससे एक प्राणी की हत्या हो जाती है अतःमारण - मन्त्र का प्रयोग बहुत ही सोच - समझकर तथा नितान्त आवष्यक होने पर ही करना चाहिए । स्मरणीय है कि किमी की हत्या के पाप का फल साधक को भी किसी न  किसी रूप से अवश्य भोगना पड़ता है , अतः यदि अनिवार्य विवशता न हो तो मारण - प्रयोग का साधन हरगिज नहीं करना चाहिए ।