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वशिकरण मन्त्र

सर्वजन वशीकरण मंत्र -


आगे लिखा मन्त्र सब लोगों को वश में करने वाला माना जाता है । इस मंत्र को सिद्ध करने के लिये १००८ की संख्या में जप करना चाहिये । 


वशिकरण मन्त्र इस प्रकार है : 


' ॐ सर्वलोक वशंकराय कुरुकर स्वाहा '

वशिकरण मन्त्र के सिद्ध हो जाने पर , इस मन्त्र के द्वारा निम्नलिखित प्रयोगों की वस्तुओं को अभिमंत्रित करना चाहिये । प्रयोग में आने वाली सभी वस्तुओं को एकत्र करके उन पर उक्त सिद्ध मन्त्र को १०८ बार जप कर फूक मारने से अभिमंत्रण का कार्य पूरा हो जाता है ,

अभिमन्त्रित वस्तुथों का यथाविधि प्रयोग करना चाहिये । इस मन्त्र के प्रयोग निम्न लिखित हैं । 


ब्रह्म दण्डी का प्रयोग - 


वशिकरण मन्त्र के लिये ब्रह्म दगडी , वच और - कूठ - इन तीनों वस्तुओं को समभाग लेकर , कूट पीस कर चूर्ण करलें । फिर उस चूर्ण को उक्त वशिकरण मन्त्र द्वारा १०८ बार अभिमंत्रित करे ।

फिर अभिमंत्रित चूर्ण को पान में रख कर , वह पान उस व्यक्ति को खिलादे जिसे वश में करना हो । इस अभिमन्त्रित चूर्ण युक्त पात को खाने वाला व्यक्ति पान खिलाने वाले के वशीभूत हो जाता है । 


वट मूल का प्रयोग - 


बरगद की जड़ को पानी में घिस कर उक्त वशिकरण मंत्र से १०८ बार अभिमंत्रित कर अपने मस्तक पर तिलक लगाएं । फिर जिस साध्य - व्यक्ति के पास जाकर पहुंचें वह देखते ही वशीभूत हो जायगा


  अपामार्ग का प्रयोग -


अपामार्ग अर्थात् योंगा . जिसे चिर - चिद्य या श्राधा - झारा भी कहत हैं का चूर्ण बनाकर उस चूर्ण को उक्त वशिकरण मन्त्र सेे पान में रख कर साध्य व्यक्ति को खिलादें , तो पान खाने वाला व्यक्ति साधक के वशीभूत हो जाता है ।


सहदेई का प्रयोग - 


सहदेई नामक बूटी कने छाया में सुखाकर चूर्ण करलें । फिर उस चूर्ण को पूर्वोक्त वशिकरण मंत्र से १०८ बार अभिमन्त्रित करके साध्य व्यक्ति को पान में रख कर खिलादें तो वह वसीभूत हो जावया ।


कुकुम का प्रयोग -


 कुकुम , नागर मोथा , कूठ , हरताल व मैनसिल , इन सब वस्तुओं को समभाग लेकर श्रनामिक उंगली के खत में पीस कर लेप बनालें , फिर उस लेप को उक्त वशिकरण मन्त्र से अपने मस्तक पर तिलक लगाकर साध्य व्यक्ति के पास पहुंचे तो वह साधक को देखते ही वशीभूत हो जाता है ।


गोरोचन का प्रयोग -


 गोरोचन , पद्म - पत्र , त्रिपंगु थोर लाल चन्दन - इन मत्र वस्तुथों को समभाग लेकर इकट्ठा पीस लें । फिर उस लेप को उक्त  वशीकरण मंत्र से १०८ बार अभिमन्त्रित करके अपने मस्तक पर तिलक लगाकर जिस साध्य - व्यक्ति के पास पहुंचें वह साधक को देखते ही वशीभूत हो ।


श्वेत दुर्वा का प्रयोग - 


श्वेत दुर्वा अर्थात् सफेद रंग वाली दूब को गाय के दूध में घिस कर उक्त वशीकरण मंत्र से १०८ बार अभिमन्त्रित करें , फिर उसका मस्तक पर तिलक लगाकर - साध्य व्यक्ति के पास पहुंचें तो वह देखते ही वशीभूत हो जाता है । 

सफेद याक के फूलों को छाया में सुखा कर कपिला गाय के दूध में पीसकर उसे पूर्वोक्त वशीकरण मंत्र से १०८ बार अभिमन्त्रित करके अपने मस्तक पर तिलक लगाकर साध्य व्यक्ति के सामने जा खड़े हों , तो वह देखते ही वशीभूत हो जायगा ।


हरताल का प्रयोग - 


हरताल , असगन्ध तथा सिन्दूर को केले के रस में पीस कर , उक्त वशीकरण मन्त्र से १०८ बार अभिमन्त्रित करके अपने मस्तक पर तिला कर साध्य व्यक्ति के पास पहुंचे तो वह देखते ही वशीभूत हो जाता है । 

अपामार्ग बीज का प्रयोग - 


अपामार्ग अर्थात् भोंगा के बीजों को कपिला गाय के दूध में पीस कर उक्त वशीकरण मंत्र से १०८ बार अभिमन्त्रित करके अपने मस्तक पर तिलक लगा कर जिस साध्य व्यक्ति के पास पहुंचा जायगा वह देखते ही वशी भूत हो जायगा । 


पान एवं तुलसी का प्रयोग -


 पान तथा तुलसी के पत्तों को कपिला गाय के दूध में पीस कर , उक्त वशीकरण मंत्र से १०८ बार अभिमन्त्रित करके उसका अपने मस्तक पर तिलक लगाकर साध्य व्यक्ति के सामने जा पहुंचे तो वह देखते ही वशीभूत हो जाता है । 


सर्वजन वशीकरण दूसरा मन्त्र - 

नीचे लिखा मन्त्र भोजन किये बिना ५०० की संख्या में जप करने से सिद्ध हो जाता है । 

मन्त्र यह है : - 


" ॐ मों ड्रो " 


जिस व्यक्ति को वश में करने की इच्छा से इस वशीकरण मन्त्र का जप किया जाता है , वह चाहे राजा हो अथवा सामान्य व्यक्ति , पत्र हो अथवा मित्र , भाई हो या और कोई , वशीभूत हो जाता है । 


सर्वजन वशीकरण तीसरा मंत्र -


 नीचे लिखा वशीकरण मन्त्र १००० की संख्या में जप करने से सिद्ध होता है । मंत्र यह है “ 


ॐ चामुण्डे जय जय वश्यं करि जय जय सर्वे सत्वान्नम स्वाहा । "


वशीकरणमंत्र को सिद्ध कर लेने के बाद श्रावश्यकता के समय रविवार अथवा मंगल वार के दिन इस मंत्र दारा गुलाब के फूल को १०८ बार अभिमन्त्रित करके जिस व्यक्ति को वह फूल दे दिया जायेगा वह साधक के वशीभूत हो जायगा । 

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