वशिकरण / सम्मोहन /Hypnosis


किसी भी विद्या का दुरुपयोग आपके लिए दुखों का कारण बन सकता हैं । मैं आपको कुछ मन्त्र तो बताऊँगा लेकिन उसका प्रयोग दुर्भावना से न करे।

वशिकरण या सम्मोहन शब्द आते ही अधितर पुरुषों के दिमाक में केवल किसी स्त्री का  ख्याल आता और इस्त्रीयो में अपने पति को बस में करने क़ा ख्याल जरूर आता है

अधिकतर लोगों ने google में वशिकरण /सम्मोहन शब्द का serch  भी इसी उदेश्य से किया होगा और ये हास्यास्पद बिल्कुल भी नही हैं क्योंकि बेबस इन्सान करे भी तो क्या करे उसे स्त्री शुख चाहये और स्त्री को चाहए की उसका पति उसके इशारो पर नृत्य करे ।

 चाहे आपका उद्देश्य  कुछ भी हो लेकिन आपको प्रेम और त्याग से ही किसी चीज को हासिल करना चाहिए।कुछ सम्मोहन मंत्र, तंत्रो से आप उसे हासिल तो कर सकते हो लेकिन वो अल्प समय के लिए ही होगा। 

उसे लंबे समय तक बनाए रखने के लिए तो आपको प्रेम और विस्वास का ही सहारा लेना पडेगा ।किसी भी विद्या का दुरुपयोग आपके लिए दुःखों का कारण बन सकता हैं अतः ख्याल रखे की आपके हाथों कुछ गलत ना हो जाए कि आपको बाद में पछताना पड़े।

ऐसा नही है की वशिकरण,सम्मोहन से केवल किसी को वश में किया जाता है  Hypnosis से बहुत से रोगों को भी दूर किया जाता हैं अध्यात्म में भी इसका अच्छा खासा प्रयोग किया जाता हैं।

यह चिकित्सा सीधे समस्या की जड़ पर काम करती है। और व्यक्ति को कठिन से कठिन समस्या से बड़ी ही सरलता से मुक्त कर देती है। यह चिकित्सा पद्धति व्यक्ति के अवचेतन मस्तिष्क काम करती है। इसके द्वारा आप –अपने आत्म विश्वास और इच्छा शक्ति  को बढ़ा कर पूर्ण सफल बन सकते है।

सम्महोन से आप अपने जीवन में डिप्रेशन, चिंता अनिद्रा, तनाव से छुटकारा पा सकते है।कोई भी मानसिक बिमारी जो ठीक न हो रही हो ऐसी बिमारियों को बड़ी ही सहजता से समाप्त किया जाता हैसामान्यतः इन प्रयोगों का उपयोग जीवन रक्षा , स्वाय - साधन अथवा विपत्ति को दूर करने के लिये किया जाता है । 

अतः जब अनिवार्य आवश्यकता अनुभव हो , तभी इन प्रयोगों का साधन करना चाहिये । किसी पर - स्त्री के प्रति इन प्रयोगों का साधन तभी करना चाहिये , जब कि उसके बिना स्वयं को प्राण - रक्षा असम्भव अनुभव होती हो । दुराचार अथवा किसी को लग्जित करने के उद्देश्य से इन प्रयोगों को करना वर्जित हैं।

सम्महोन मन्त्र-  

                       " ॐ आकर्षय । "


प्रयोग विधि- 

 इस मंत्र को अर्द्ध रात्रि में आकाश के नीचे खड़ा हो कर 1200 मंत्र जाप करने से तथा साध्ये का ध्यान करने से 2  या 3 दिन में आकर्षित हो जाता हैं


   सम्महोन मन्त्र - 

ॐ नमो आदि रूपाय अमुक। आकर्षण कुरु कुरु स्वाहा 

विशेष -


उक्त मन्त्र में जहाँ ' अमुक शब्द आया है , वहाँ साध्या - क के नाम का उच्चारण करना चाहिये । 

साधन विधि-  दीपावली अथवा होलीको 10000 की सख्या में जप करने  से यह मन्त्र सिद्ध हो जाता है ।


प्रयोग विधि 


काले धतूरे के पत्ते का रस तथा गोरोचन इन दोनों को मिलाकर पेस ले कनेर की कलम में भोजपत्र के पर उक्त मन्त्र को लिखकर  खैर के अंगारों पर तपाये । इस विधि से साध्य - व्यक्ति यदि १०० योजन भी चल गया हो . तो भी वह आकषि सम्महोन होकर समीप चला आता है ।अथवाअनामिका अंगुली के रक्त से सफेद केनेर की कलम द्वारा भोज पत्र पर इस सम्मोहन मन्त्र को साधय व्यक्ति के नाम सहित लिखे। फिर उसके नाम से १०८ बार अभिमन्त्रित कर सहद में डूबा दे , व्यक्ति आकषित होकर लौट आता हैं।


अथवा


 मनुष्य की खोपड़ी में मोरोचन तथा केसर द्वारा मन्त्र लिखकर तीनों समय बर की अग्नि में तपाने में साम्य - व्यक्ति का आकर्षण होता है

  सम्महोन मन्त्र -

                     " ॐ ह्री ठं ठं  स्वाहा । " 


साधन विधि-



 मंगलवार से प्रारम्भ कर , इस मन्त्र को १०००० की संख्या में जपना आरम्भकर । जप पूर्ण हो जाने पर जप संख्या का दशांश होम , होमका दयाश तर्पण तथा तर्पण का दशांश ब्राहाण भोजन कराय । 


प्रयोग - विधि नीचे लिखें मन्त्र संख्या के अनुसार । 


सम्महोन मन्त्र -

ॐ नमो भगवते रुद्राय एदृष्टि लेखि नाहरः स्वाहा दुहाई कंसासुर की जूट जूट फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा ।


साधन विधि किसी भी मंगलवार से आरम्भ कर इस सम्महोन मन्त्र का २१ दिन था दिन में अपना ११ मंगलवारों में कुल १००० की संख्या में जप करें ।

सम्महोन मन्त्र जप पूरा हो जाने पर , मन्त्र का दशांश होम , होम का दशांश तर्पण तथा तर्पणका दशांश बाहाण भोजन कराय । 


परीक्षा विधि-



 उक्त दोनों सम्महोन मन्त्रों (  परीक्षा करने की सिधि एक जैसी है , जो इस प्रकार है

 एक सरकंडे को बीच में से चीर कर दो लम्बे टकडे करलें तथा दोनों सरकंड के सिरों को दो मनुष्य अपने दोनों हाथों में अलग - अलग पकड़े । फिर चुहे के बिल की मिट्टी , सरसों और बिनोल - इन तीनों का पूर्ण कर , उसे मन से अभिमन्त्रित करके सरकण्डों के सीरो पर मारे । इस क्रिया से यदि वे दोनों टुकड़े एक दूसरे की ओर झुकते हुए आपस में मिल जाय तो समझे कि मन्त्र सिद्ध हो गया है । 


प्रयोग विधि - 



जिस व्यक्ति का आकर्षण करना हो , वह यदि परदेश में हो तो उसके पहनने के वस्त्र पर पूर्वोक्त वस्तुओं के चूर्ण को अभिमन्त्रित करे।



सम्महोन मन्त्र-    

                                        ॐ हों ह्रीं हां नमः 


साधन एवं प्रयोग विधि इस सम्महोन मन्त्र का प्रतिदिन १०००० की संख्या में जप करते हुए साध्य व्यक्ति का ध्यान करना चाहिए । नित्य १५ दिनों तक इस प्रकार साधन करते रहने से साक्ष्य व्यक्ति का आकर्षण होता है ।