उपवास अथवा व्रत
व्यासदेव जी ने पुराणों में उपवास , व्रत का माहात्म्य अनेक स्थानों पर बताया है । क्या व्रत पालन से भौतिक लाभ होता है उपवास केवल भौतिक लाभ हेतु होता ? ऐसा नहीं है उपवास शब्द का अर्थ है पास रहना । हमें अगर भगवान के निकट रहना है , तो उपवास करना आवश्यक है । इसीलिए उपवास के दिन सभी भौतिक इंद्रिय तृप्ती के कार्य से दूर रहकर भगवान के नाम स्मरण में अधिक से अधिक समय बिताना चाहिए । ब्रह्मवैर्वत पुराणमें कहा गया है कि
उपावृत्तस्य पापेभ्यो यस्तु वासो गुणैः सह । उपवासः स विज्ञेयः सर्व भोग विवर्जितः । ।
व्रत का मतलब सभी पापों से और इंद्रिय तृप्ति के कार्यो से दूर रहना । निश्रित ही व्रत के पालन से धर्म , अर्थ , काम , मोक्ष इनकी प्राप्ति तो होती है , पर उसके साथ पंचम पुरूषार्थ भगवद्भक्ति अथवा कृष्णप्रेम भी प्राप्त होता है । श्री हरि भक्ती विलास नामक ग्रंथमें बताया गया है कि
एकादशी व्रतं नाम सर्व काम फल प्रदम । कर्तव्यं सर्वदा विप्रैः विष्णु प्रीणनकारणम् ॥
भगवान् श्रीविष्णु की प्रसन्नता के लिए ब्राह्मणोंको एकादशी व्रतका पालन करना चाहिए । यह उनका कर्तव्य है ।
इसीलिए हर एक व्यक्ति को भगवान् की प्रसन्नता के लिए इस उपवास का पालन करना चाहिए । भगवान श्रीविष्णु प्रसन्न होने से सुख और समृद्धि अपने आप प्राप्त होती है ।
हमारे देश में सामान्यतः सब लोग उपवास करते हैं । सप्ताह के किसी दिन उपवास रखते है और उस के द्वारा विविध देवताओं को प्रसन्न करने की इच्छा होती है । व्रत के पीछे कोई तो उद्देश्य निश्चित ही होता है । साधारणत : धन प्राप्ति के हेतु , बीमारी से ठीक होने के लिए राजनीति में पद के लिए अच्छी नौकरी,पत्नी या पति प्राप्ति के लिए लोग उपवास करते है ।
भौतिक इच्छा प्राप्ति के लिए उपवास करने से बहुत बार फल मिलता है ।
पर यह फल भौतिक होने से सिर्फ क्षणिक होता है । ऐसे व्रत करना मतलब भगवान से किया हुआ सौदा ही है । हमारी इच्छा पूरी होते ही व्रत समाप्त करके हम भूल जाते है । जरूरत खत्म होते ही वैद्य की गुंजाईश नहीं रहती !
श्रील प्रभुपाद ऐसे अनुष्ठानों को ' भौतिक धर्म ' कहते थे । भगवान् श्रीकृष्ण के भक्त भी एकादशी , जन्माष्टमी , रामनवमी, गौर पौर्णिमा , नरसिंह जयंती , व्यास पूजा या और अन्य वैष्णव तिथि कों उपवास करते है व्रत रखते है ।
इसके पीछे उनका क्या उद्देश्य होता है ? वस्तुतः भक्तों की कोई भी भौतिक कामना नही होती । भक्त अपने आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह व्रत करते है । व्रत का पालन करना यह मूल सिद्धांत न होकर , भगवान् के प्रति अपनी श्रद्धा बढाना यह कारण है ।
उपवास करने से मन शुद्ध होता है
मन को वश में करके भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा बढाना यह कारण है । मन को वश में करके भगवान श्रीकृष्ण की सेवा उत्तम प्रकार से करने के लिए उपवास सहायक होता है । एकादशी के दिन अन्न का त्याग करके शरीर की आवश्यकताएँ कम करके श्रवण - कीर्तन के द्वारा भगवान् की अधिक से अधिक सेवा करना यही उपवास का उद्देश्य है । इससे भगवान संतुष्ट होते है । भारत में अनादि कालसे एकादशी के व्रत का पालन किया जाता है । लेकिन अभी लोगोंको अध्यात्म के प्रति कोई रूचि नहीं है । अगर कोई एकादशी व्रत रखना चाहता है तो घरके लोग नाराज होते है ।
एकादशी व्रत का पालन बड़े - बुजुर्ग लोगों को करना है , जवानों को तो खा - पीकर मौज करनी चाहिए ऐसा उपदेश दिया जाता है । श्री एकादशी तथा अन्य उत्सवों के वक्त व्रत रखने को आध्यात्मिक जीवन का महत्त्वपूर्ण अंग मानते है । वे कहते है , " यह सभी विधि - विधान हमारे महान आचार्योनें उन लोगों के लिए बनाए है जो दिव्य जगत् में भगवान्का संग पाने के इच्छुक है । महात्मागण इन सभी विधि - विधानों को मानते है , इसलिए उन्हें फल मिलता है ।
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