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तन्त्र साधना के प्रयोग

प्राचीन तंत्र साधना के प्रयोग  -




आपकी जानकारी के लिए, प्राचीन तंत्र साधना  में वर्णित प्रयोगों का वर्णन यहां किया जा रहा है। तंत्रों की प्राचीन प्रणाली में वर्णित प्रयोग इस प्रकार हैं।  छह कर्मों का वर्णन - 


तंत्र साधना के लिए 6 प्रकार के कर्म होते हैं।



 1. शांतिकार तंत्र साधना- शांति के प्रयोगों से कृतिका और ग्रह दोष मिट जाते हैं।  

2. वशीकरण तंत्र साधना - वशीकरण का उपयोग करके, महिला, पुरुष और अन्य जानवरों को वश में किया जाता है। 

३ . स्तम्मन तंत्र साधना- स्तम्भन के प्रयोगों द्वारा विभिन्न जीवों की प्रवृत्ति को अवरुद्ध किया जाता है ।

४ . विद्व ' षण तंत्र साधना - विद्वेषण के प्रयोगों द्वारा मित्र भावापन्न प्राणियों की पारस्परिक प्रीति को नष्ट करके उनमें देष - भाव उत्पन्न करा दिया जाता है । 

५ . उच्चाटन तंत्र साधना- उच्चाटन के प्रयोगों द्वारा किसी मनुष्य श्रादि को अपने गांव , नगर , देश थादि से दूर कर दिया जाता है । 

६ . मारण तंत्र साधना - मारण के प्रयोगों द्वारा जीवों का पाण - नाश किया जाता है । 


इन तंत्र साधना के  ६ कर्मों के १ भेद तथा अनेक उपभेद होते हैं ।


परन्तु तन्त्र - शास्त्र की सभी तन्त्र साधना  इन ६ कर्मो के ही अन्तर्भूत होती हैं श्रतः इन कर्मों के लिये इनके देवता , काल , आदि की जानकारी प्राप्त करके किसी भी साधन में प्रवृत्त होना चाहिये ।

षट कमों के देवता - पट कर्मों के देवता नीचे लिखे अनुसार कहे गये हैं :

१ . शान्ति कर्म की अधिष्ठात्री देवी - रति 
२ . वशीकरण की अधिष्ठात्री देवी - वाणी 
३ . स्तम्भन की अधिष्ठात्री देवी - रमा 
४ . विद्धषण की अधिष्ठात्री दवी - ज्येष्ठा
५ उच्चाटन की अधिष्यत्री देवी - दर्गा
उच्चाटन की अधिष्ठात्री देवी - दुर्गा
६ . मारण की अधिष्ठात्री देवी - भद्रकाली 

षटकर्मी की दिशाएं कौन से कर्म में कौनसी दिशा प्रशस्त है . इसे नीच लिखे अनुसार समझना चाहिये :

 १ . शान्ति कर्म में - ईशान कोण 
२ . वशीकरण में - . उत्तर दिशा . 
३ . स्तम्भन में - पूर्व दिशा 
४ . विद्धषण में - नैऋत्य कोण 
५ . उच्चाटन में - वायव्यकोण 
६ . मारण में अग्निकोण . 

षटकर्मों के लिये काल निर्णय कौनसा कर्म किस काल ( समय ) में करना चाहिये । इसे नीचे लिखे अनुसार समझना चाहिये ।

१ - वशीकरण - दिन के पूर्व भाग में । .
२ - विद्धषण तथा उच्चाटन दिन के मध्य भाग में । 
३ - शांति और पुष्टि कर्म - दिन के अंतिम भाग में । 
४ - मारण कर्म - सन्ध्या काल में । 

षट कर्मों के लिये, तन्त्र साधना के लिये  आसन कौन सा कर्म किस आसन पर बैठ कर करना उचित है , इसे नीचे लिखे अनुसार समझना चाहिये 


१ - वशीकरण के लिये मेंढा या भेड़ के चमड़े का आसन 
२ - याकर्षण के लिये - व्याघ्र चर्म अर्थात बाघ के - चमड़े का आसन 
३ - उच्चाटन के लिये - ऊंट के चमड़े का आसन । 
४ - विदोषण के लिये - घोड़े के चमड़े का आसन । 
५ - मारण के लिये - भैंसे के चमड़े का आसन । 
६ - मोक्ष साधन कर्म के लिये - हाथी के चमड़े का आसन । 
लाल रंग के कम्बल के आसन पर बैठकर सब कर्मों का साधन किया जा सकता है ।

माला , जप , मुद्रा , ध्यान आदि के सम्बन्ध में विशेष जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहये ,तांत्रिक साधनों की पूर्व एवं पूर्ण जानकारी प्राप्त किये बिना कोई साधन सफल नहीं होता यह स्मरण रखना चाहिये । 




तन्त्र साधना में  वशीकरण मंत्र - आगे लिखा मन्त्र सब लोगों को वश में करने वाला माना जाता है । इस मंत्र को सिद्ध करने के लिये १००८ की संख्या में जप करना चाहिये । . . .

मन्त्र इस प्रकार है : 

' ॐ सर्वलोक वशंकराय कुरुकर स्वाहा ' 

मन्त्र के सिद्ध हो जाने पर , इस मन्त्र के द्वारा निम्नलिखित प्रयोगों की वस्तुओं को अभिमंत्रित करना चाहिये । प्रयोग में आने वाली सभी वस्तुओं को एकत्र करके उन पर उक्त सिद्ध मन्त्र को १०८ बार जप कर फूक मारने से अभिमंत्रण का कार्य पूरा हो जाता है ,

 तन्त्र साधना में  वस्तुथों का यथाविधि प्रयोग करना चाहिये । इस मन्त्र के प्रयोग निम्न लिखित हैं । 

ब्रह्म दण्डी का प्रयोग - 

ब्रह्म दगडी , वच और - कूठ - इन तीनों वस्तुओं को समभाग लेकर , कूट पीस कर चूर्ण करलें । फिर उस चूर्ण को उक्त मन्त्र द्वारा १०८ बार अभिमंत्रित करे ।

फिर अभिमंत्रित चूर्ण को पान में रख कर , वह पान उस व्यक्ति को खिलादे जिसे वश में करना हो । इस अभिमन्त्रित चूर्ण युक्त पात को खाने वाला व्यक्ति पान खिलाने वाले के वशीभूत हो जाता है । 

वट मूल का प्रयोग -

 बरगद की जड़ को पानी में घिस कर उक्त मंत्र से १०८ बार अभिमंत्रित कर अपने मस्तक पर तिलक लगाएं । फिर जिस साध्य - व्यक्ति के पास जाकर पहुंचें वह देखते ही वशीभूत हो जायगा

  अपामार्ग का प्रयोग -

अपामार्ग अर्थात् योंगा . जिसे चिर - चिद्य या श्राधा - झारा भी कहत हैं , का चूर्ण बनाकर उस चूर्ण को उक्त मंत्र से १०८ चार अभिमन्त्रित करके , उसे पान में रख कर साध्य व्यक्ति को खिलादें , तो पान खाने वाला व्यक्ति साधक के वशीभूत हो जाता है ।

सहदेई का प्रयोग -

सहदेई नामक बूटी कने छाया में सुखाकर चूर्ण करलें । फिर उस चूर्ण को पूर्वोक्त मंत्र से १०८ बार अभिमन्त्रित करके साध्य व्यक्ति को पान में रख कर खिलादें तो वह वसीभूत हो जावया ।

कुकुम का प्रयोग -

कुकुम , नागर मोथा , कूठ , हरताल व मैनसिल , इन सब वस्तुओं को समभाग लेकर श्रनामिक उंगली के खत में पीस कर लेप बनालें , फिर उस लेप को उक्त मंत्र से १०८ बार अभिमन्त्रित करके अपने मस्तक पर तिलक लगाकर साध्य व्यक्ति के पास पहुंचे तो वह साधक को देखते ही वशीभूत हो जाता है ।

गोरोचन का प्रयोग -

गोरोचन , पद्म - पत्र , त्रिपंगु थोर लाल चन्दन - इन मत्र वस्तुथों को समभाग लेकर इकट्ठा पीस लें । फिर उस लेप को उक्त मंत्र से १०८ बार अभिमन्त्रित करके अपने मस्तक पर तिलक लगाकर जिस साध्य - व्यक्ति के पास पहुंचें वह साधक को देखते ही वशीभूत हो ।

श्वेत दुर्वा का प्रयोग -

 श्वेत दुर्वा अर्थात् सफेद रंग वाली दूब को गाय के दूध में घिस कर उक्त मंत्र से १०८ बार अभिमन्त्रित करें , फिर उसका मस्तक पर तिलक लगाकर - साध्य व्यक्ति के पास पहुंचें , तो वह देखते ही वशीभूत हो जाता है । 

श्वेत अर्क पुष्प का प्रयोग -

सफेद याक के फूलों को छाया में सुखा कर कपिला गाय के दूध में पीसकर उसे पूर्वोक्त मंत्र से १०८ बार अभिमन्त्रित करके अपने मस्तक पर तिलक लगाकर साध्य व्यक्ति के सामने जा खड़े हों , तो वह देखते ही वशीभूत हो जायगा ।

हरताल का प्रयोग -

हरताल , असगन्ध तथा सिन्दूर को केले के रस में पीस कर , उक्त मन्त्र से १०८ बार अभिमन्त्रित करके अपने मस्तक पर तिला कर साध्य व्यक्ति के पास पहुंचे तो वह देखते ही वशीभूत हो जाता है । 

अपामार्ग बीज का प्रयोग - 

अपामार्ग अर्थात् भोंगा के बीजों को कपिला गाय के दूध में पीस कर उक्त मंत्र से १०८ बार अभिमन्त्रित करके अपने मस्तक पर तिलक लगा कर जिस साध्य व्यक्ति के पास पहुंचा जायगा वह देखते ही वशी भूत हो जायगा । 

पान एवं तुलसी का प्रयोग -

पान तथा तुलसी के पत्तों को कपिला गाय के दूध में पीस कर , उक्त मंत्र से १०८ बार अभिमन्त्रित करके उसका अपने मस्तक पर तिलक लगाकर साध्य व्यक्ति के सामने जा पहुंचे तो वह देखते ही वशीभूत हो जाता है । 


 तन्त्र साधना में  वशीकरण दूसरा मन्त्र - नीचे लिखा मन्त्र भोजन किये बिना ५०० की संख्या में जप करने से सिद्ध हो जाता है । 


मन्त्र यह है : -   ॐ मों ड्रो 

तन्त्र साधना में  व्यक्ति को वश में करने की इच्छा से इस मन्त्र का जप किया जाता है , वह चाहे राजा हो अथवा सामान्य व्यक्ति , पत्र हो अथवा मित्र , भाई हो या और कोई , वशीभूत हो जाता है । 

सर्वजन वशीकरण तीसरा मंत्र - नीचे लिखा मन्त्र १००० की संख्या में जप करने से सिद्ध होता है । मंत्र यह है 



ॐ चामुण्डे जय जय वश्यं करि जय जय सर्वे सत्वान्नम स्वाहा । 

मंत्र को सिद्ध कर लेने के बाद श्रावश्यकता के समय रविवार अथवा मंगल वार के दिन इस मंत्र दारा गुलाब के फूल को १०८ बार अभिमन्त्रित करके जिस व्यक्ति को वह फूल दे दिया जायेगा वह साधक के वशीभूत हो जायगा । 

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