शाबर मन्त्र सिद्ध -
जनश्रुती है कि कलियुग के आरम्भ होने पर देवाधिदेव महादेव शिवजी ने वेदो से उतपन्न मन्त्रों को कील दिया जिसके कारण वे अप्रभावी हो गये ,
परन्तु यथार्थ में उनकी सामथ्र्य समाप्त नहीं हुई , केवल यही अन्तर रहा कि यदि उत्कीलन विधि से साबर मंत्र सिद्ध कर लिया जाय तो वे अपना चमत्कार प्रदर्शित करने में समर्थ हो जाते है ।
कैसे करे शाबर मंत्र सिद्ध
साबर मन्त्र सिद्ध ,उत्कीलन विधि का ज्ञान बड़े विद्वानों तक ही सीमित था अतः सामान्य मंत्र - साधकों को उनके साधना में कठिनाइयां होने लगीं ।
ऐसी स्थिति में कतिपय सिद्ध महापुरुषों द्वारा शाबर - मन्त्रों की रचना को गई ।
ये मन्त्र लोक भाषाओं में रचे गये थे और इन्हें सिद्ध करने हेतु उत्कीलन की प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता भी न थी , अतः ये बहूत लोकप्रिय हुए और इनका प्रचारप्रसार भी खूब हुआ शावर मंत्रो के रचयिता सिद्ध - पुरुष रहे होंगे इसमें तो सन्देह नहीं .
साबर मन्त्र सिद्ध के बारे में अलग - अलग मत रहे है
लिपिबद्ध न किये जाने के कारण ये मन्त्र गुरु - शिष्य परम्परा के माध्यम से केवल कण्ठ - निवासी ही बने रहे ।
आरम्भ में बहुत समय तक विद्वानों को इनके महत्व का ज्ञान नहीं हो सका परन्तु कालान्तर में इनका प्रभाव प्रकट होते हुए प्रत्यक्ष देखा गया औऱ सभी इनका महत्व स्वीकार करने को बाध्य हुए ।
फलतः इन मन्त्रों के संकलन का कार्य भी आगे बढ़ा ।
प्रस्तुत प्रकरण में मन्त्र - साधना सम्बन्धी प्रारम्भिक - ज्ञातव्य विषयों का उल्लेख किया जा रहा है । इनका सम्यक् - ज्ञान होने पर ही साधक को मंत्र - साधन में सफलता प्राप्त हो सकती है ।
कैसे सिद्ध करे शावर मन्त्र, - उत्कीलन विधि १ :-
कलियुग में महादेवजी ने सभी मन्त्र कील दिये हैं अतः ये फलदायक सिद्ध नहीं होते । यदि उनका उत्कीलन कर दिया जाय तो वे सब फलप्रद सिद्ध होते हैं ।
अतः यहाँ उत्कीलन की विधियाँ बताई जा रही हैं ।
अतः यहाँ उत्कीलन की विधियाँ बताई जा रही हैं ।
किसी भी मन्त्र का सिद्ध करने से पूर्व उसका नियम के अनुसार उत्कीलन कर लेने से सिद्धि एवं सफलता शीघ्र तथा अवश्य प्राप्त होती है
जिस मन्त्र को जपना हो उसे अष्टगन्ध द्वारा भोजपत्र के ऊपर 108 बार लिखकर
धूप , दीप , नैवेद्य आदि से उसका पूजन करके ब्राह्मण भोजन करायें ।
फिर एक मिट्टी के पात्र में पानी भर कर मन्त्र - लिखित भोजपत्रों को उसमें डालते जायें अथवा उन्हें किसी नदी की धारा में प्रवाहित करदें तो उस मन्त्र का उत्कीलन हो जाता है ।
अष्टगन्ध में निम्नलिखित वस्तुओं की गणना की जाती है
१ . गोरोचन २ . कपूर ३ .हाथी का मद ४ .अगर ५ .कस्तूरी ६ .केशर ७ .लाल चन्दन और ८ . श्वेत चन्दन
साबर मन्त्र सिद्ध , उत्कीलन विधि २:-
मिट्टी द्वारा पुरुष के आकार वाली इष्टदेव की प्रतिमा बनायें फिर उसकी प्राण प्रतिष्ठा करे तदुपरान्त शुभ महर्त में भोजपत्र के ऊपर मन्त्र लिखकर , उसे प्रतिमा की छाती में लगाएँ तथा एक मास तक उसका धूप , दीप , नैवेद्य आदि से पूजन कर तदुपरान्त गुरु की आज्ञा लेकर उस मन्त्र को तो स्वयं लेले तथा प्रतिमा को नदी में बहाकर ब्राह्मणों को भोजन करायें । फिर मन्त्र का जप करें तो वह सिद्ध हो जायेगा ।


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